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Tuesday, May 30, 2017

यह जूनुन की रफ्तार है

रफ्तार जो जिद़गी में जूनुन भर दे और ऐसी रफ्तार जिसे हम अनुभब कर सकते है आजकल बाज़ार में आने वाली बाईक्स जो दिल में जूनून भर दे  बेहतर स्पीड के साथ अच्छा  माइलेज देती है । आकर्षक रंगों में आने वाली यह बाईक्स युवाओं के मन को भाती है । बदलते वक्त के साथ इनमे कई तरह के बदलाव हुए है जो इनके आकर्षण को और भी बढ़ाते है।

केन्द्रीय विश्वविद्यालय लाईब्रेरी सांइस के द्वितीय सत्र में पढ़ने वाले विजय सिंह का कहना है कि इन बाईक में आने वाले फीचर उन्हें बहुत भाते है। रफ्तार से वे अपना तनाव भी दूर करते है क्योकिं वे इन्हें चलाते समय ऐसा अनुभव करते है कि वह बिल्कुल मुक्त है और वे हर किसी चीज़ को पा सकते है तथा वे किसी ऐसी जगह पर है जिसके वे नज़ारे ले रहे है,तथा इसे अनुभव भी कर रहे है।

विश्वविद्यालय के अकिंत कुमार जो समाजशास्त्र में द्वितीय सत्र के छात्र है उनका कहना है कि बाईक्स चलाना उनका पैशन है तथा वे इसे एक पागलपन भी कहते है। उन्हें हाइवे पर तेज़ी से बाइक चलाना पसंद है क्योकिं इससे वे अपने आप को औरों से अलग भी दिखाते है तथा और लोगों की हैरानी का केंद्र भी बनते है क्योकिं उन्होनें अकसर लोगों को यह कहते हुए सुना है कि आगे क्या होगा।

ऐसा ही कुछ मानना है विवेक का, जो विश्वविद्यालय में लाईब्रेरी सांइस के द्वितीय सत्र के छात्र है जो यह मानते है कि इन बाईक्स के साथ ही वे अपने आप को प्रकृति के साथ जुड़ा हुआ भी देखते है। बाईक्स उनके एड्वचरस सफ़र को और भी रोमांचक, खुशनुमा बना देती है।

इतिहास में यदि इन बाईक्स के बारे मे देखा जाएं तो सबसे पहले इनकी शुरुआत 19वीं शताब्दी के आस-पास मानी जाती है। साईकिल को और अच्छा बनाने के साथ ही मोटरबाईक्स की शुरुआत हुई थी। सन् 1860 में पेरी मिशेव्स जो एक लुहार था जिसने शुरुआत में एक साईकिल निर्माण किया था तथा इसके कुछ समय के बाद अपने बेटे के साथ मिलकर मोटरबाईक्स का अविष्कार किया इसी सिलसिले ने धीरे-धीरे रफ्तार के दौर को आगे बढ़ाया और नई दुनिया को अपना परिचय दिया ।

आखिर कारण जो भी हो चलाने का लेकिन इन बाईक्स के न जाने कितने ब्रांड़ है बाजार में जो इस आनंद को युवाओं को देते है। मारुति,महिन्द्रा, रॉयल इनफिल्ड,होड़ा,केटीएम,डयक्ति जैसे ब्रांड़ इस साथ को और भी बढ़ाते है।





Monday, May 29, 2017

केन्द्रीय विश्वविद्यालय में मनाया गया चतुर्थ दीक्षांत समारोह

मुख्यातिथि प्रोफेसर नंदा(S)के साथ कुलपति कुलदीप चंद अग्निहोत्री(M) प्रतिभागी को सम्मानित करते हुए 
  केन्द्रीय विश्वविद्यालय  हिमाचल प्रदेश ने अपना चतुर्थ दीक्षांत समारोह धर्मशाला कॉलेज के कला  केन्द्र में शुक्रवार को मनाया। दीक्षांत समारोह में मुख्यातिथि के रुप में प्रोफेसर वेद प्रकाश नंदा ने शिरकत की, जो जॉन इवॉस यूनिवस्ट्री और स्टर्म कॉलेज ऑफ ला डेनवर कोलेराडो यूएसए, के प्रोफेसर है।
करीब 11 बज़े शुरु हुए इस समारोह में 15 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल, 4 को एड़वांस डिप्लोमा ,15 को सर्टिफिकेट  देकर सम्मानित किया गया। इसके आलाबा 10 को पीएचडी डिग्री तथा 228 विद्याथियों को डिग्रियां बांटी गई।
समारोह में भाषण देते हुए प्रोफेसर नंदा ने बच्चों को संघर्षों से नहीं घबराते हुए आगे बढ़ने का सुझाब दिया तथा उन्होनें अपने कुछ जीवन के पलों को भी याद किया।
इसके आलाबा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अरुण मायरा ने भी विद्यार्थियों को नई चीज़े सीखने को कहा ताकि वे अपने जीवन में आगे बढ़ सके।
केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर कुलदीप चन्द अग्निहोत्री ने कहा कि युनिवस्ट्री में लाइफ़ सांइस के कोर्स शुरु होगें तथा कांगड़ा  कला  को सीखने के लिए भी डिप्लोमा कोर्स शुरु किए जाएगें । बता दे कि कांगड़ा कला अपने आप मे एक कला के रुप मे जानी जाती है तथा इनके बारे में शोभा सिंह को एक महान चित्रकार के रुप में जाना जाता है।

कार्यक्रम में डिग्रियां बाटंने के पश्चात अन्त में कुलाधिपति ने बच्चों के साथ बातचीत भी की। जिसमें शिक्षा से सम्बधित, रोजंगार,भबिष्य के प्रति जागरुकता के बारे में बात की । इस बातचीत के अशं में सभी विभागों के डीन भी सम्मलित रहे। इस बातचीत में विद्यार्थियों ने काफ़ी रुचि दिखाई। समारोह में डिग्रियां लेने पहुचें विद्यार्थियों में भी काफ़ी उत्साह दिखा। 

Wednesday, March 8, 2017

केन्द्रीय विश्वविद्यालय में अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस

अजंना देवी

8 मार्च को अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाएगा। इस वर्ष की थीमbe bold for change है. क्या सच में ही ऐसा हो रहा है? इस बारे में महिलाओं के अलग-अलग विचार हो सकते हैं? पर क्या वे वास्तव में ऐसा करने में सक्षम हैं?
कामिनी शर्मा
एक ओर जहां कई तरह के बदलाव समाज में आ रहे है वहीं लोगों की सोच में भी बदलाव आ रहे हैं।
कामिनी शर्मा जो केन्द्रीय विश्वविद्यालय में B.Sc. Physics (Honors)की छात्रा हैं वे इस समय को बदलाव का युग मान रही हैं जिसमें वे अपने आपको बहुत आगे बढ़ते हुए देखना चाहती है।

दिपाली गिल
प्रियंका, विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र की छात्रा हैं,का कहना है कि उन्हें शिक्षा के द्वारा और आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है। वे अपना हर ख्वाब पूरा कर सकती है।

दीक्षा जो MBA कर रही हैं वे देश के सुरक्षा बलों में अपना कैरियर बनाना चाहती हैं ताकि वह और युवतियों का हौंसला बढ़ा सकें।

गीता कश्यप, केन्द्रीय विश्वविद्यालय से पी.एचडी कर रही हैं उनका कहना है कि समाज को महिलाओं के प्रति रवैया बदलना ही होगा क्योंकि यह समय की मांग है।

दीक्षा
दिपाली गिल, जो B.Sc.  Physics (Honors) में कर रही हैं, उनका कहना है कि महिलाओं को आत्मविश्वासी होना चाहिए ताकि वे सब कुछ कर सकें और किसी से भी अपने आप को कम न समझें।

रितिका शर्मा जो MBA की छात्रा हैं उनका कहना है कि लड़कियों को अपने सपने पूरे करने के लिए अपने आप को स्वंय ही आगे बढ़ाना होगा।  

                           Conversation with girls on Women's Day